Tuesday, 6 June 2023

घर

 

झलक दिख जाती है तब 

जब डूबने से बच कर

ऊपर आता है कोई 

अन्यथा नीचे तो बस लाशें है

जीवित तो कोई नहीं


स्मरण आ जाता है तब 

जब नींद को दूर कर

ऊपर आता है कोई 

अन्यथा नीचे तो बस स्वप्न है

जागृत तो कोई नहीं


कुचक्र टूट जाता है तब 

जब हवाओ को चीरकर

ऊपर आता है कोई

अन्यथा नीचे तो सभी लाचार है

पुरुष तो कोई नहीं


अर्थ मिल जाता है तब

जब चल चित्र में चलते हुए

घर पहुंच जाता है कोई

अन्यथा नीचे तो बस मेला है

बिकता है जहाँ हर कोइ

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घर

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